February 14, 2012

डे फे से

मैं इतने जोर से हाथ घुमाऊँगा 
कि एक तमाचे के बराबर ऊर्जा मुक्‍त हो 
तमाचा किसी को लगे भी न और 
मुझे संतोष हो जाए कि मैंने 
जोरदार विरोध प्रकट कर दिया 
 

March 06, 2011

एक गैर जिम्‍मेदाराना कविता

मैं जिम्‍मेदार नहीं हूँ
महँगाई के बढने का
कचडे के ढेर की तरह रोज
घोटालों के निकलने का
मैं जिम्‍मेदार नहीं हूं देश में
किसी भी तरह की गडबडियों का
सचिवों मंत्रियों नौकरशाहों की नि‍युक्तियों का
मैं बिल्‍कुल जिम्‍मेदार नहीं हूँ
किसी के मरने का

February 14, 2011

फिर वही दिल(न) लाया हूँ

आज एक‍ रि-पीट करने का मन है।
ब्‍लॉगिंग की भाषा में जिसे रिठेल कहा जाता है। यदि ब्‍लॉगिंग में पहली बार पोस्‍ट प्रकाशित करने के कृत्‍य को पोस्‍ट पीटना कहा जाए तो दुबारा उसी पोस्‍ट को उसी ब्‍लॉग पर प्रकाशित करने पर उसे रि-पीट कहा जा सकता है। इस तरह यह शब्‍द हिंदी और अँग्रेजी दोनों में समझने पर सही अर्थ प्रदान करता है।  उसी प्रकार ठेल और रिठेल शब्‍द का प्रयोग भी तदनुसार ब्‍लॉगर जन करते हुए पाए जाते हैं। ज्‍यादातर बलॉगर पोस्‍ट ठेलते हैं। जैसे किसी नदी में कुछ ठेल दो। ठेल दिए गंगा जी में। पहुँच गई पोस्‍ट इंटरनेट के महासागर में। अंतर बस इतना है कि इधर रिठेल भी कर सकते हैं। नदी में किसी चीज की सिर्फ ठेल हो सकती है, रिठेल नहीं।  यहॉं ठेल करने से रिठेल करने में सुविधा रहती है।