पिछले महीने की अंतिम
तारीख को एक शादी में दिल्ली पधारना हुआ. कुछ और भी मित्र साथ थे. बाद में वापस
आकर सोचे कि अच्छा हुआ फरवरी की बाढ़ आने से पहले कार्यक्रम निपट गया. वरना वहॉं स्वच्छंद
विचरण न कर पाते. दिल्ली जाने का फायदा उठाते हुए साथी पार्टी को चकमा देकर हम, तब
तक एक वर्चुअल शख्सियत संजय ग्रोवर से मुलाकात करने चले गए. अब सोचते हैं कि इंटरनेट
से पहले लोग बिना भौतिक रुप से मिले पत्रादि के द्वारा संपर्क में रहते थे. वह भी
तो वर्चुअल ही था, कि नहीं था ?