घुमड घुमड कर आए बादल ( कविता छोटे बच्चों के लिए )
July 23, 2010
कविता लिखी बच्चों के लिए (बडे बच्चे भी आजमा सकते )
घुमड घुमड कर आए बादल
रिमझिम बारिश लाए बादल
गर्मी ने खुब की शैतानी
ठंडी बूँद गिराए बादल
तड तड तड तड बिजली चमके
गड गड गड गुर्राए बादल
कागज की है नाव तैरती
नदी सडक पर लाए बादल
छप छप छप छप बिट्टू चलती
छींटों से घबराए बादल
सर सर सर सर हवा बह रही
पौधों को हर्षाए बादल
झूम रही हैं डाली डाली
पत्तों को नहलाए बादल
चिडिया झटक रही पंखों को
उसके पंख भिगाए बादल
चिंटू मिंटू खेलें पानी
मम्मा से डांट खिलाए बादल
बिट्टू की तो हो गई छुट्टी
सब से काम कराए बादल
छतरी लेकर निकलीं मैडम
जोर से बारिश लाए बादल
कुत्ते ने छाता क्यों न लगाया
पप्पू का प्रश्न उठाए बादल
दादा बोले अब तो बरसो
बहुत देर से आए बादल
जल्दी जल्दी लौट रहे थे
घर में कुछ भूल आए बादल




