चलो,
चुप हो जाऍं, कुछ दिनों के लिए
जैसे,
चुप हो जाते हैं दो अनन्य मित्र
सहनशीलता की आखिरी सीमा
आने से पहले ,
बिना एक-दूसरे को नुकसान पहुँचाए
करते रहते हैं, अपना काम
साझे मिशन के लिए
सदाशयता से ,
कभी मिल जाने के लिए
जैसे,
मॉं-बाप पूरे करते रहते हैं अपना कर्त्तव्य
औलादों को झगडते हुए या
बहकते हुए, देखकर भी
लगे रहते हैं घर की भलाई में
क्योंकि , शक्तिप्रदर्शन में तबाही घर की ही है
चाहे जीते कोई भी
जैसे,
चुप रह जाती है समझदार जनता
नेताओं के, मरने मारने के उकसावे पर भी
जलाये रखती है इंसानियत का चिराग
अपने दिलों में
जैसे,
असली देशप्रेमी कोशिश करता है
कि उसका गौरव उसके दूसरे भाई/बहन को
शर्मसार न कर सके
जैसे,
माली सींचता रहता है अपने पौधों को
खिलाता है नये-नये फूल
खूबसूरत बनाने के लिए बाग को,
बगैर दूसरे का बाग उजाडे
चलो,
मनोरंजन और काबिलियत दिखाने के,
कुछ और तरीके खोजें
स्थगित करें, तलवारबाजी , मुर्गेबाजी और मुक्केबाजी से
अपने ही दोस्तों को लहूलुहान करके
विजेता बनने की हिंसक चमक को
चलो,
ऐसी बातें न शुरू करें
जिसका अंत न कर सकें
और जो अगले संवाद की
संभावना को समाप्त कर दे
चलो,
थोडा कम होशियार बनना
स्वीकार कर लें
क्योंकि अगला भी
बुद्धिमान ही है, हमेशा !
चलो,
कुछ नेताओं की कुश्ती को
राष्ट्रीय टूर्नामेंट और
कुछ बाहुबलियों के झगडे को
गृहयु्द्ध मानने से इंकार कर दें
चलो,
फसादियों को निराश कर दें
और 'मनुष्य' के आगे-पीछे बिना कोई
शब्द लगाये उसे बचाये रखें
चलो,
जब कुछ नहीं कर सकते तो
तमाशबीनी बंद करें !
और अपना-अपना काम करें
हाँ ! मजे लेने वाले उतने ही
भागीदार हैं,
जितने की मजमा लगानेवाले
कम से कम इतने से मजे का
त्याग तो कर ही सकते हो मेरे दोस्त ।
यदि नहीं , तो फिर चुप रहने का कोई मूल्य नहीं ।
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