February 08, 2013

दिल्‍ली यात्रा व संजय ग्रोवर से एक मुलाकात


पिछले महीने की अंतिम तारीख को एक शादी में दिल्‍ली पधारना हुआ. कुछ और भी मित्र साथ थे. बाद में वापस आकर सोचे कि अच्‍छा हुआ फरवरी की बाढ़ आने से पहले कार्यक्रम निपट गया. वरना वहॉं स्‍वच्‍छंद विचरण न कर पाते. दिल्‍ली जाने का फायदा उठाते हुए साथी पार्टी को चकमा देकर हम, तब तक एक वर्चुअल शख्सियत संजय ग्रोवर से मुलाकात करने चले गए. अब सोचते हैं कि इंटरनेट से पहले लोग बिना भौतिक रुप से मिले पत्रादि के द्वारा संपर्क में रहते थे. वह भी तो वर्चुअल ही था, कि नहीं था ?

January 30, 2013

जनवरी गमन

नए साल के पहले महीने का अंत करीब आ चुका है. बस अंतिम सांसे गिन रहा है. साल 2013 का एक महीना खर्चा हो गया. समय एक ऐसी पूँजी है जो अपने आप खर्च होती रहती है. हम उसके खर्च करने में कंजूसी नहीं कर सकते न ही ज्‍यादा खर्च कर सकते. इसे किस तरह खर्च करना है यह काफी कुछ हमारे ऊपर निर्भर करता है. लेकिन ठीक मुद्रा की तरह ही हम इसे पूरी स्‍वतंत्रता से इस्‍तेमाल नहीं कर सकते.

सर्दी भी अपना पूरा जोर दिखाकर हॉंफने सी लगी है. धीरे-धीरे थम रही है. अभी एक-दो बार अचानक ब्रेक लगाकर फिर थोड़ी दूर चलेगी फिर धम्‍म से थम जाएगी.

December 31, 2012

काला दिन 30.12.12

वह लडकी जो एक प्रतीक बन चुकी है। समाज और प्रशासन की असंवेदनशीलता का। साथी ही हमारे तंत्र की असफलता का जिसकी वजह से उसकी मृत्‍यु हुई। 

कल न्‍यूज चैनल दिल्‍ली की चलती बस में हुए बलात्‍कार पीडित की मृत्‍यु पर शोक और आक्रोश व्‍यक्‍त करने गए प्रदर्शनकारियों को कम ही दिखा पाई। वह लडकी जिसे दामिनी अमानत और भी कई छद्म नाम दिए गए, देश भर में महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन अत्‍याचार पीडितों की एक प्रतीक बन गई है।