January 29, 2011

नए साल में नया क्‍या है

 संवादघर पर की गई मेरी कविता रूपी टिप्‍पणी या टिप्‍प्‍णी रूपी कविता।  आज बहुत दिन बाद गूगल डाक्यूमेंट्स में सेव  एक पुराने नोट में मिल गई।   

नए साल में नया क्‍या है
अपने खुश होने का बहाना क्‍या है
हकीकत को रुबरू कैसे करें
इस जिंदगी में नया क्‍या है
मेरे होने में नया क्‍या है
मेरे मिटने में नया क्‍या है



कुछ भी लिखने में नया क्‍या है
हर नये में नया क्‍या है

सुबहो शाम में नया क्‍या है
सोने जगने में नया क्‍या है

हुस्‍न -ए-उल्‍फत में नया क्‍या है
एक चमडी की हकीकत क्‍या है
अपने इल्‍म का फायदा क्‍या है
काम यह कहीं आता क्‍या है

मत पूछो नया साल लाता क्‍या है
कहिए इंसा नया करता क्‍या है

सच नए साल में नया क्‍या है
नई नजर में कुछ नया क्‍या है ?

किसी ने पूछा जिंदगी क्‍या है
हमने पूछा जीने का बहाना क्‍या है

नई नजर हो तो सब कुछ नया है
नया साल भी नया है
पुराना यार भी नया है
करोडों साल का बूढा सूरज
रोज सबेरे नया नया है
रात में करते झिलमिल तारे
खरबों साल से नए नए हैं
इक बूढे की बूढी प्रियतम
प्रेम नयन से नई नई है

बच्‍चे की निश्‍छल ऑंखों में
बूढी दुनिया नई नई है

नई ऑंखें हों हर दिन नया है
नया साल को भी इंसा ही बनाता नया है
जीने के लिए कुछ झूठ भी चाहिए
इस काम में चहिए सिर्फ हकीकत कहॉ है

कविता अधूरी जैसी है । साल भी अभी बहुत बाकी है।

9 comments:

  1. नई नजर हो तो सब कुछ नया है
    नया साल भी नया है
    पुराना यार भी नया है
    करोडों साल का बूढा सूरज
    रोज सबेरे नया नया है
    रात में करते झिलमिल तारे
    खरबों साल से नए नए हैं
    इक बूढे की बूढी प्रियतम
    प्रेम नयन से नई नई है

    बच्‍चे की निश्‍छल ऑंखों में
    बूढी दुनिया नई नई है

    बिल्कुल सही है कि अगर नज़र ,नज़रिया , विचार नए हों तो सब कुछ नया है ,वर्ना ज़िंदगी के परिवर्तन भी नए नहीं लगते

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  2. यदि चाहें कि अगला पल नया हो, तो हो जायेगा।

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  3. नई ऑंखें हों हर दिन नया है
    नया साल को भी इंसा ही बनाता नया है
    जीने के लिए कुछ झूठ भी चाहिए
    इस काम में चहिए सिर्फ हकीकत कहॉ है..
    जीने के लिए कुछ झूठ चाहिए....सच में सर जीने के लिए कुछ झूठे सपने ..कुछ झूठे सपने और कुछ उम्मीदें..की आगे कुछ अच्छा होगा...
    शानदार kavita...

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  4. Wonderful and refreshing poem, especially after it took a U-turn!

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  5. मन-मन में पूरी होती रहेगी कविता.

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  6. कविता पूरी होने का इंतज़ार है ...
    इस इंतज़ार में नया क्या है?

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  7. नया कथ्य है नई कहन है
    वैचारिक उन्मेष गहन है

    करोडों साल का बूढा सूरज
    रोज सबेरे नया नया है

    इक बूढे की बूढी प्रियतम
    प्रेम नयन से नई नई है

    इसको कोई कहे पुराना
    हमको भला कहाँ सहन है!

    ...बधाई।

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  8. किसी ने पूछा जिंदगी क्‍या है
    हमने पूछा जीने का बहाना क्‍या है

    बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..

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  9. नई ऑंखें हों हर दिन नया है
    नया साल को भी इंसा ही बनाता नया है
    जीने के लिए कुछ झूठ भी चाहिए
    इस काम में चहिए सिर्फ हकीकत कहॉ है
    वाह!! बहुत सुन्दर है. वैसे यदि अब आप इसे rewrite करें तो और भी बेहतर बना सकते हैं.

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नेकी कर दरिया में डाल