April 30, 2012

नया खिलौना

नया खिलौना मैंने पाया
मेरे मन को है यह भाया

खेलूं मैं इससे सारा दिन
रहूं नहीं पल भर इसके बिन

बच्‍चों को जब इसे दिखाया
सबके मन में लालच आया 

April 21, 2012

इंट‍रमिशन के बाद : अन्‍ना-बाबा लाइव

कल अन्‍ना हजारे और बाबा रामदेव को टीवी पर लाइव पत्रकार वार्ता करते पाया। जिसका अंदेशा था वह हुआ। कहीं कुछ बिखरा।

यह एक ऐसा आंदोलन(?) था जिसमें हम टीवी और इंटरनेट के माध्‍यम से शामिल थे। हमने इंडिया अंगेन्‍स्‍ट करप्‍शन की साइट को लाइक‍ किया। हमने अन्‍ना की फोटो लगाई अपनी फेसबुक की वाल पर। हमने ट्वीट और रिट्वीट किया अन्‍ना के पक्ष में। उस समय आंदोलन और अन्‍ना एक दूसरे के पर्याय थे। हमने न्‍यूज चैनलों पर डटकर अन्‍ना के अनशन का लाइव देखकर उनकी टीआरपी बढाई। कुछ लोगों ने हमसे ज्‍यादा किया। मैदान में गए भाषण सुने। नारे लगाए। टोपी पहनी। बाइट दिया। अपनी हैसियत के अनुसार फुटेज खाई। कुछ लोगों का आरोप था कि इन लोगों ने आइसक्रीम,गोल गप्‍पे और चाट वगैरह भी खाई। 

April 16, 2012

अवांछित पंक्तियां

प्रेम में प्रेम भी है
कविता में अब भी कुछ कविता बची हुई है
ऐसा लगता है
शब्‍दों का सम्‍मान हमारी दगाबाजी का
निहायत जरुरी हिस्‍सा है 
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